नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी को जबरन बाहर निकाला गया।
वजह एक नहीं बल्कि दो फर्जी इनोवेशन दावे। पहले चीनी रोबोट डॉग को अपना बताया, फिर कोरियन सॉकर ड्रोन को भी “इन-हाउस” करार दिया। सरकार ने बिजली काट दी, बैरिकेड लगा दिए और स्टॉल खाली करा दिया।
AI Summit India 2026: भारत इन दिनों दुनिया को अपनी AI ताकत दिखाने में जुटा है। India AI Impact Summit 2026 को ग्लोबल साउथ में आयोजित पहले बड़े AI सम्मेलन के तौर पर पेश किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, Google CEO सुंदर पिचाई, OpenAI के सैम ऑल्टमैन, Anthropic के डारियो अमोडेई और Microsoft के ब्रैड स्मिथ जैसी 20 से अधिक विश्व नेताओं और टेक दिग्गजों की मौजूदगी में 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश AI प्रोजेक्ट्स में प्रतिबद्ध किया गया।
लेकिन इतने बड़े मंच पर एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने ऐसा कांड कर दिया कि पूरी दुनिया में भारत की किरकिरी हो गई।
Bloomberg, NBC News, Al Jazeera, Euronews, Associated Press — हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मीडिया हाउस ने इस शर्मनाक घटना को कवर किया।
आइए जानते हैं कि आखिर हुआ क्या और गलगोटिया यूनिवर्सिटी को AI Summit 2026 से बाहर क्यों किया गया।
🔴 पहला स्कैंडल: चीनी रोबोट डॉग को “ओरियन” बताकर अपना इनोवेशन पेश किया

17 फरवरी 2026 को India AI Impact Summit के एक्सपो एरिया में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक चार पैरों वाला रोबोटिक डॉग प्रदर्शित किया गया। यूनिवर्सिटी की कम्युनिकेशन विभाग प्रमुख प्रोफेसर नेहा सिंह ने सरकारी चैनल DD News के सामने कैमरे पर कहा:
“आपको ओरियन से मिलना चाहिए। इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने डेवलप किया है।”
उन्होंने इसे यूनिवर्सिटी के 350 करोड़ रुपये के AI निवेश से जोड़ते हुए बताया कि यह रोबोट कैंपस पर ऑटोनॉमस सर्विलांस करने में सक्षम है।
लेकिन सच कुछ और था। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, टेक एक्सपर्ट्स और इंटरनेट यूजर्स ने मिनटों में पहचान लिया कि यह रोबोट दरअसल चीन की Unitree Robotics कंपनी का Unitree Go2 है। यह दुनियाभर में कमर्शियली उपलब्ध है और भारत में ₹2-3 लाख (करीब $1,600-$2,800) में ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। यहां तक कि रोबोट पर Unitree की ओरिजिनल ब्रांडिंग भी मौजूद थी।
चीन से जुड़े एक अकाउंट ने भी X पर ट्वीट किया: “एक भारतीय यूनिवर्सिटी ने चीनी रोबोट Unitree Go2 को अपना इनोवेशन बताकर प्रदर्शित किया।”
🔴 दूसरा स्कैंडल: कोरियन सॉकर ड्रोन को भी “इन-हाउस” बताया

रोबोडॉग विवाद की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक और बड़े झूठ में पकड़ी गई। यूनिवर्सिटी ने अपने स्टॉल पर एक “सॉकर ड्रोन एरीना” भी प्रदर्शित किया था। एक वीडियो में यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि को यह कहते सुना गया:
“एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर एप्लीकेशन तक, हमारे पास सिमुलेशन लैब और एप्लीकेशन एरीना दोनों हैं। यह भारत का पहला कैंपस-बेस्ड सॉकर एरीना है।”
लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे भी एक्सपोज कर दिया। यह ड्रोन दक्षिण कोरिया की कंपनी Helsel Group का Striker V3 ARF निकला, जो भारतीय बाजार में लगभग ₹40,000 में उपलब्ध है। Helsel ने 2015 में ड्रोन सॉकर की शुरुआत की थी और 2017 में इसे दक्षिण कोरिया में लॉन्च किया था। यूथ कांग्रेस ने भी X पर आरोप लगाया कि यह कोरियन प्रोडक्ट है।
इस तरह गलगोटिया पर डबल एक्सपोज हो गया — एक चीनी और एक कोरियन प्रोडक्ट, दोनों को स्वदेशी इनोवेशन बताया गया।
🔴 सरकार का एक्शन: बिजली काटी, बैरिकेड लगाए, स्टॉल खाली कराया

18 फरवरी 2026 को सरकार ने तेज कार्रवाई की:
1. स्टॉल खाली करने का आदेश: दो सरकारी अधिकारियों के अनुसार, गलगोटिया यूनिवर्सिटी को AI Summit एक्सपो से अपना स्टॉल तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया।
2. बिजली सप्लाई काट दी गई: PTI के एक वीडियो में दिखाया गया कि गलगोटिया के पैवेलियन की बिजली काट दी गई और यूनिवर्सिटी के सदस्य अंधेरे में खड़े दिखे।
3. बैरिकेड लगाए गए: PTI के एक और वीडियो में अधिकारियों को गलगोटिया के स्टॉल के सामने बैरिकेड लगाते हुए देखा गया।
4. IT सचिव का सख्त बयान: IT सचिव एस. कृष्णन ने कहा — “हम चाहते हैं कि असली और वास्तविक काम ही एक्सपो में प्रदर्शित हो। गलत सूचना को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। हम विवाद नहीं चाहते।”
5. अतिरिक्त सचिव का बयान: MeitY के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा — “इरादा इनोवेशन को रोकना नहीं है, लेकिन यह भ्रामक नहीं होना चाहिए। यह विवाद दूसरों की मेहनत पर हावी नहीं होना चाहिए।”
गलगोटिया का बचाव: पलटते बयान, बदलती कहानी
गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया में कई विरोधाभास दिखे:
पहला बयान (17 फरवरी): यूनिवर्सिटी ने आलोचना को “प्रोपेगैंडा कैंपेन” बताया और कहा कि इससे छात्रों का मनोबल गिर रहा है।
दूसरा बयान (18 फरवरी): माफी मांगते हुए कहा — “हमारी प्रतिनिधि कम जानकारी रखती थीं, वह प्रोडक्ट की तकनीकी उत्पत्ति से अनजान थीं। कैमरे पर आने के उत्साह में उन्होंने गलत जानकारी दे दी।”
“हमने कभी दावा नहीं किया”: यूनिवर्सिटी ने कहा कि “गलगोटिया ने यह रोबोडॉग नहीं बनाया है, न ही कभी ऐसा दावा किया है।”
लेकिन X पर एक Community Note ने इस दावे को फैक्ट-चेक किया और लिखा: “उन्होंने रोबोट का नाम ‘ओरियन’ रखा और स्पष्ट रूप से कहा कि इसे उनकी टीम ने डेवलप किया है।”
रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौर ने एक अजीब सफाई दी: “यह दो शब्दों — ‘develop’ और ‘development’ — का गड़बड़झाला है। हमने इसे develop नहीं किया, हमने इसके development पर काम किया।”
प्रोफेसर नेहा सिंह: विवाद का चेहरा
प्रोफेसर नेहा सिंह इस पूरे मामले का सबसे चर्चित चेहरा बनीं। नेहा BITS पिलानी (हैदराबाद) से PhD हैं और Computational Geometry में विशेषज्ञता रखती हैं। वे अगस्त 2023 में गलगोटिया में शामिल हुई थीं।
नेहा की सफाई: “हमने कभी दावा नहीं किया कि यह हमारा, भारतीय या गलगोटिया का है। इसकी मुख्य ब्रांडिंग अभी भी उस पर है। मैं जवाबदेही लेती हूं कि शायद मैंने ठीक से कम्युनिकेट नहीं किया।”
LinkedIn पर “Open to Work”: विवाद के कुछ घंटों बाद नेहा सिंह के LinkedIn प्रोफाइल पर हरे रंग का “#OPENTOWORK” फ्रेम दिखाई दिया, जिसने उनकी नौकरी जाने की अटकलों को हवा दी। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, हालांकि कुछ समय बाद यह स्टेटस हटा दिया गया। गलगोटिया के रजिस्ट्रार ने कहा कि “नेहा को निलंबित नहीं किया गया है, उन्हें कुछ समय अलग रहने को कहा गया है।”
राजनीतिक तूफान: विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस विवाद ने तेजी से राजनीतिक रंग ले लिया:
कांग्रेस का हमला: कांग्रेस ने X पर लिखा — “मोदी सरकार ने AI के मामले में भारत को दुनियाभर में हंसी का पात्र बना दिया। AI Summit में चीनी रोबोट को अपना बताया जा रहा है। यह वाकई भारत के लिए शर्मनाक है।”
पवन खेड़ा का तंज: कांग्रेस नेता ने लिखा — “@AshwiniVaishnaw ने साबित कर दिया कि भारत में AI का मतलब ‘Ashwini is Incompetent’ है। यह AI Summit नहीं, सस्ता चाइना बाज़ार बन गया।”
उमर अब्दुल्ला की आलोचना: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
JD(U) का रुख: JD(U) प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक” बताते हुए गलगोटिया के खिलाफ “सख्त से सख्त कार्रवाई” की मांग की।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया: पाकिस्तानी पत्रकार उमर कुरैशी ने ट्वीट किया — “भारत और मोदी के लिए कितनी शर्मनाक बात है। AI Summit को एक यूनिवर्सिटी ने बर्बाद कर दिया जिसने रोबोट डॉग और ड्रोन दोनों को अपना बताया — जबकि दोनों बाजार में खरीदे जा सकते हैं।”
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सोशल मीडिया पर मीम्स का तूफान
इंटरनेट ने गलगोटिया को नहीं बख्शा:
- एक वायरल मीम में काल्पनिक “GALGOTIA” रॉकेट कैचर दिखाया गया
- “LPU, Sharda और Amity गलगोटिया का पतन देखकर…” वाला मीम ट्रेंड हुआ
- “Thank God गलगोटिया ने AI कुंभ मेला में यह नहीं दिखाया” — ऐसे व्यंग्य वायरल हुए
- यूजर्स ने गलगोटिया के Instagram को स्कैन किया और बताया कि यूनिवर्सिटी का फीड फ्रेशर पार्टियों, बॉलीवुड सेलिब्रिटीज (वरुण धवन, जैकलीन फर्नांडीज, जॉन अब्राहम, सारा अली खान, कार्तिक आर्यन) और मूवी प्रमोशन से भरा है — शैक्षणिक उपलब्धियों की जगह ग्लैमर पर फोकस है
एक यूजर ने लिखा: “पहले ‘हमारे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने डेवलप किया।’ अब ‘ग्लोबली उपलब्ध टूल्स हैं।’ तालियां मिलीं तो इनोवेशन बताया, सवाल उठे तो procurement कहा। असली AI यहां रोबोट नहीं, प्रेस रिलीज है।”
Unitree Go2 क्या है? — पूरी जानकारी
Unitree Go2 चीन की Shenzhen स्थित कंपनी Unitree Robotics का AI-संचालित क्वाड्रुपेड (चार पैरों वाला) रोबोट है। यह रिसर्च, शिक्षा और इंडस्ट्रियल सर्विलांस के लिए बनाया गया है। इसकी शुरुआती कीमत करीब $1,600 (₹1.3 लाख) है और प्रो वर्जन $2,800 (₹2.3 लाख) तक जाता है। यह ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध है और दुनियाभर की यूनिवर्सिटीज इसे लर्निंग टूल के तौर पर इस्तेमाल करती हैं — लेकिन कोई इसे अपना इनोवेशन नहीं बताता।
Helsel Striker V3 सॉकर ड्रोन — दूसरा एक्सपोज
Helsel Striker V3 ARF दक्षिण कोरिया की Helsel Group का प्रोडक्ट है। Helsel ने 2015 में ड्रोन सॉकर का आविष्कार किया और 2017 में इसे कोरिया में लॉन्च किया। भारत में यह ड्रोन करीब ₹40,000 में मिलता है। गलगोटिया ने इसे “एंड-टू-एंड इन-हाउस इंजीनियरिंग” बताया, जो पूरी तरह झूठा दावा निकला।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी कौन है?
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश में स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी है। इसकी स्थापना सुनील गलगोटिया ने की, जिन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पढ़ाई की और 1980 के दशक में प्रकाशन व्यवसाय से करियर शुरू किया। पहले गलगोटिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (GIMT) की स्थापना हुई, फिर 2011 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया।
AI Summit की असली उपलब्धियां जो दब गईं
यह विवाद इसलिए और दुखद है क्योंकि AI Summit में कई सकारात्मक चीजें हो रही थीं जो इस शर्मिंदगी की छाया में दब गईं:
- $100 अरब से अधिक का AI निवेश प्रतिबद्ध हुआ
- अदानी ग्रुप, माइक्रोसॉफ्ट, योट्टा जैसी कंपनियों ने बड़े निवेश की घोषणा की
- भारत का पहला सॉवरेन “AI Box” अनावरण किया गया
- 500 से अधिक सेशन और 3250 से ज्यादा स्पीकर्स ने भाग लिया
- 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों ने शिरकत की
- Google CEO सुंदर पिचाई ने नया AI Professional Certificate कोर्स घोषित किया
इस मामले से क्या सबक मिलता है?
यह घटना कई स्तरों पर सबक देती है:
1. शैक्षणिक संस्थानों के लिए: सरकारी वैश्विक मंच पर विदेशी प्रोडक्ट को स्वदेशी बताना न सिर्फ बेईमानी है, बल्कि देश की छवि को भी नुकसान पहुंचाता है।
2. सोशल मीडिया युग का सच: आज किसी भी झूठे दावे की सत्यता मिनटों में जांची जा सकती है। फैक्ट-चेकिंग अब सिर्फ पत्रकारों का काम नहीं — आम लोग भी करते हैं।
3. सरकार के लिए: ऐसे बड़े आयोजनों में प्रदर्शकों की स्क्रीनिंग और वेरिफिकेशन का सख्त सिस्टम जरूरी है।
4. छात्रों के लिए: ग्लोबल टूल्स का उपयोग सीखने के लिए करना अच्छी बात है, लेकिन उन्हें अपना बताना अकादमिक बेईमानी है।
निष्कर्ष
गलगोटिया यूनिवर्सिटी का AI Summit 2026 विवाद सिर्फ एक यूनिवर्सिटी की गलती नहीं है — यह भारत के शैक्षणिक और इनोवेशन इकोसिस्टम में पारदर्शिता की कमी का प्रतीक है। एक चीनी रोबोट डॉग और एक कोरियन सॉकर ड्रोन को “मेड इन गलगोटिया” बताने का यह दुस्साहस उस मंच पर किया गया जहां दुनिया के 20 राष्ट्राध्यक्ष और टेक इंडस्ट्री के सबसे बड़े नाम मौजूद थे।
बिजली कटना, बैरिकेड लगना, स्टॉल से बेदखली, प्रोफेसर का इस्तीफा, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में शर्मिंदगी — ये सब मिलकर एक ऐसी कहानी बनाते हैं जो लंबे समय तक याद रखी जाएगी। उम्मीद है कि यह घटना भविष्य में शैक्षणिक संस्थानों को ईमानदारी और सच्चे इनोवेशन का रास्ता दिखाएगी।
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Schema Markup (FAQ):
Q1: गलगोटिया यूनिवर्सिटी को AI Summit से क्यों निकाला गया?
गलगोटिया ने चीनी कंपनी Unitree Robotics के Go2 रोबोट डॉग को “ओरियन” नाम से अपना इनोवेशन बताकर प्रदर्शित किया। सरकार ने स्टॉल खाली कराया और बिजली काट दी।
Q2: ओरियन रोबोट डॉग असल में क्या है?
यह Unitree Go2 है, जो चीन की Unitree Robotics का AI-पावर्ड रोबोटिक डॉग है। यह भारत में ₹2-3 लाख में ऑनलाइन उपलब्ध है।
Q3: प्रोफेसर नेहा सिंह कौन हैं?
नेहा सिंह गलगोटिया यूनिवर्सिटी की कम्युनिकेशन विभाग प्रमुख थीं। BITS पिलानी से PhD हैं। विवाद के बाद उन्होंने कथित तौर पर इस्तीफा दिया।
Q4: सॉकर ड्रोन विवाद क्या है?
गलगोटिया ने दक्षिण कोरिया की Helsel Group के Striker V3 ड्रोन को “इन-हाउस इंजीनियरिंग” बताकर प्रदर्शित किया, जो भारत में ₹40,000 में उपलब्ध है।





