जाने क्यों हो रही है AI Summit 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की बदनामी

yash@007

Published on: 20 February, 2026

जाने क्यों हो रही है AI Summit 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की बदनामी

India AI Impact Summit 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीन की कंपनी Unitree Robotics के रोबोट डॉग को अपना इनोवेशन बताकर पेश किया, जिसके बाद भारी विवाद खड़ा हो गया। सरकार ने स्टॉल खाली कराया, प्रोफेसर ने दिया इस्तीफा और सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई।


नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 को भारत की AI क्षमताओं को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का एक ऐतिहासिक मंच माना जा रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, Google CEO सुंदर पिचाई, OpenAI CEO सैम ऑल्टमैन और Anthropic CEO डारियो अमोडेई जैसी हस्तियां इस समिट को संबोधित करने वाली थीं।

लेकिन इस सबके बीच ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक ऐसा विवाद खड़ा कर दिया जिसने न सिर्फ यूनिवर्सिटी की छवि को धूमिल किया, बल्कि भारत की AI महत्वाकांक्षाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 17-18 फरवरी 2026 को शुरू हुआ जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने AI Impact Summit के अपने प्रदर्शनी स्टॉल पर एक चार पैरों वाले रोबोटिक डॉग को प्रदर्शित किया। यूनिवर्सिटी की कम्युनिकेशन विभाग की प्रमुख प्रोफेसर नेहा सिंह ने सरकारी चैनल DD News को इंटरव्यू देते हुए इस रोबोट को “ओरियन” (Orion) नाम से पेश किया और कहा कि “इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने डेवलप किया है।” उन्होंने यह भी बताया कि यूनिवर्सिटी ने AI इकोसिस्टम बनाने के लिए 350 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

लेकिन जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों और इंटरनेट यूजर्स ने तुरंत पहचान लिया कि यह रोबोट दरअसल चीन की कंपनी Unitree Robotics का Unitree Go2 है।

यह एक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध रोबोटिक डॉग है जो दुनियाभर में रिसर्च और शिक्षा के लिए इस्तेमाल होता है और भारत में लगभग 2-3 लाख रुपये (करीब $2,800) में खरीदा जा सकता है।

सोशल मीडिया पर भड़की आग

जाने क्यों हो रही है AI Summit 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की बदनामी

वीडियो वायरल होते ही X (पूर्व Twitter), Instagram और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी को लेकर आलोचना की बाढ़ आ गई। यूजर्स ने Unitree Go2 और “ओरियन” की तस्वीरें साथ रखकर दिखाया कि दोनों एक ही रोबोट हैं।

मीम्स की बाढ़ आ गई — एक वायरल मीम में “GALGOTIA” नाम का काल्पनिक रॉकेट कैचर दिखाया गया। लोगों ने यूनिवर्सिटी के Instagram और Facebook अकाउंट्स की भी जांच शुरू कर दी और आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी शिक्षा से ज्यादा फ्रेशर्स पार्टियों, बॉलीवुड सेलिब्रिटी इवेंट्स और ग्लैमर पर फोकस करती है।

सोशल मीडिया पर यह भी आरोप लगे कि गलगोटिया ने एक सॉकर ड्रोन को भी अपना बताया था, जबकि वह भी एक विदेशी कमर्शियल प्रोडक्ट था।

सरकार ने लिया एक्शन — स्टॉल खाली कराया गया

मामला जब बेकाबू हुआ तो सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। IT सचिव एस कृष्णन ने स्पष्ट कहा कि सरकार नहीं चाहती कि कोई प्रदर्शक ऐसी चीजें दिखाए जो उनकी अपनी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई गुमराह करता है तो ऐसी विवादित एजेंसी को वहां रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, गलगोटिया यूनिवर्सिटी को 18 फरवरी को अपना स्टॉल खाली करने को कहा गया। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि जब यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने तुरंत स्टॉल नहीं खाली किया तो अधिकारियों ने बिजली की सप्लाई काट दी। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि “हमारा उद्देश्य इनोवेशन को रोकना नहीं है, लेकिन यह गुमराह करने वाला नहीं होना चाहिए।”

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने मांगी माफी

बढ़ती आलोचना के बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। यूनिवर्सिटी ने कहा कि “हम गलगोटिया यूनिवर्सिटी, AI Summit में हुई भ्रम की स्थिति के लिए गहरी माफी चाहते हैं। हमारी एक प्रतिनिधि, जो पैवेलियन संभाल रही थीं, कम जानकारी रखती थीं। वह प्रोडक्ट की तकनीकी उत्पत्ति से अवगत नहीं थीं और कैमरे पर आने के उत्साह में उन्होंने तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी दे दी, हालांकि वह प्रेस से बात करने के लिए अधिकृत नहीं थीं।”

यूनिवर्सिटी ने यह भी स्पष्ट किया कि “गलगोटिया ने यह रोबोडॉग नहीं बनाया है और न ही कभी ऐसा दावा किया है।” यूनिवर्सिटी ने इसे छात्रों के लिए एक लर्निंग टूल बताया।

प्रोफेसर नेहा सिंह ने दिया इस्तीफा

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर प्रोफेसर नेहा सिंह पर पड़ा, जो इस विवाद के केंद्र में रहीं। नेहा सिंह BITS पिलानी, हैदराबाद से PhD हैं और Computational Geometry में विशेषज्ञता रखती हैं। उन्होंने अगस्त 2023 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी जॉइन की थी।

विवाद के बाद नेहा सिंह के LinkedIn प्रोफाइल पर “Open to Work” का स्टेटस दिखाई दिया, जिसने सोशल मीडिया पर और चर्चा छेड़ दी। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, हालांकि गलगोटिया के रजिस्ट्रार ने कहा कि नेहा को निलंबित नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें कुछ समय के लिए अलग रहने को कहा गया है।

नेहा सिंह ने अपनी सफाई में कहा कि “मैंने जब ‘डेवलप’ शब्द इस्तेमाल किया था तो मेरा मतलब उस रिसर्च और प्रयोग से था जो छात्र इस डिवाइस पर कर रहे हैं, हार्डवेयर के मैन्युफैक्चरिंग से नहीं।” उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी बात ठीक से कम्युनिकेट नहीं हो पाई।

राजनीतिक विवाद भी गहराया

इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया। कांग्रेस ने इसे मोदी सरकार पर हमले का मौका बनाया। कांग्रेस ने X पर पोस्ट किया कि “मोदी सरकार ने AI के मामले में भारत को दुनिया भर में हंसी का पात्र बना दिया है। AI Summit में चीनी रोबोट को अपना बताकर दिखाया जा रहा है।” कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तीखा हमला करते हुए इसे “सस्ता चाइना बाज़ार” करार दिया।

वहीं JD(U) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि इसे भारत की AI महत्वाकांक्षाओं पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने गलगोटिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस घटना की आलोचना की।

AI Summit की बड़ी उपलब्धियों पर पड़ी छाया

यह विवाद इसलिए और अधिक शर्मनाक था क्योंकि India AI Impact Summit 2026 को ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला बड़ा AI सम्मेलन माना जा रहा था। इस समिट में 100 अरब डॉलर से अधिक का निवेश भारत की AI परियोजनाओं में प्रतिबद्ध किया गया, जिसमें अदानी ग्रुप, माइक्रोसॉफ्ट और योट्टा जैसी कंपनियां शामिल थीं। करीब 20 विश्व नेता और दर्जनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस समिट में शामिल हुए।

लेकिन गलगोटिया के इस विवाद ने मीडिया का ध्यान असली उपलब्धियों से हटाकर एक शर्मनाक घटना पर केंद्रित कर दिया।

Unitree Go2 क्या है?

Unitree Go2 चीन की Unitree Robotics कंपनी का बनाया एक क्वाड्रुपेड (चार पैरों वाला) रोबोट डॉग है। यह AI-संचालित है और दुनियाभर में रिसर्च, शिक्षा और इंडस्ट्री में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी कीमत भारत में लगभग 2-3 लाख रुपये है। यह व्यावसायिक रूप से उपलब्ध है और कोई भी इसे खरीद सकता है — इसे अपना इनोवेशन बताना ही पूरे विवाद की जड़ था।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी का इतिहास

गलगोटिया यूनिवर्सिटी की स्थापना सुनील गलगोटिया ने की थी। सुनील गलगोटिया ने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पढ़ाई की और 1980 के दशक में प्रकाशन व्यवसाय से शुरुआत की। बाद में उन्होंने गलगोटिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (GIMT) की स्थापना की, जिसे 2011 में उत्तर प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया। यह यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा में स्थित है।

क्या सीखा जा सकता है इस विवाद से?

यह घटना भारत के शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक बड़ा सबक है। सरकार द्वारा आयोजित उच्च-स्तरीय वैश्विक मंच पर विदेशी उत्पाद को स्वदेशी इनोवेशन बताना न सिर्फ बेईमानी है, बल्कि यह देश की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाता है। IT सचिव कृष्णन ने सही कहा कि “असली और प्रामाणिक काम ही ऐसे मंचों पर प्रदर्शित होना चाहिए।”

सोशल मीडिया के इस युग में, जहां किसी भी दावे की सत्यता मिनटों में जांची जा सकती है, किसी भी संस्थान के लिए झूठे दावे करना खतरनाक हो सकता है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी का यह मामला इस बात का प्रमाण है कि एक वायरल वीडियो किसी संस्थान की वर्षों की प्रतिष्ठा को पलभर में बर्बाद कर सकता है।

निष्कर्ष

गलगोटिया यूनिवर्सिटी का AI Summit विवाद 2026 की सबसे चर्चित शैक्षणिक विवादों में से एक बन चुका है। चीनी Unitree Go2 रोबोडॉग को “ओरियन” के नाम से अपना इनोवेशन बताना, सरकार द्वारा स्टॉल खाली कराया जाना, प्रोफेसर नेहा सिंह का इस्तीफा, और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप — यह सब मिलकर एक ऐसी कहानी बनाते हैं जो भारत की AI यात्रा में एक शर्मनाक अध्याय के रूप में याद रखी जाएगी। लेकिन उम्मीद है कि यह घटना भविष्य में संस्थानों को पारदर्शिता और ईमानदारी का पाठ भी पढ़ाएगी।

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