AI Summit का मजाक बना दिया इस यूनिवर्सिटी ने – दुनियाभर में भारत की बेइज्जती

yash@007

Published on: 20 February, 2026

AI Summit का मजाक बना दिया इस यूनिवर्सिटी ने - दुनियाभर में भारत की बेइज्जती

20 राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री, Google-Microsoft-OpenAI के CEO, $100 अरब का निवेश — और फिर एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने ₹2 लाख का चीनी रोबोट “अपना इनोवेशन” बताकर सब बर्बाद कर दिया। Bloomberg, AP, Al Jazeera, NBC News, Euronews, Gulf News और यहां तक कि चीन का Global Times — सबने भारत का मजाक उड़ाया।

भारत ने India AI Impact Summit 2026 को अपनी सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी उपलब्धि के रूप में पेश किया था। ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला बड़ा AI सम्मेलन। भारत मंडपम में 70,000 वर्ग मीटर का एक्सपो। 500 से अधिक सेशन। 3,250 से ज्यादा स्पीकर।

प्रधानमंत्री मोदी ने खुद उद्घाटन किया। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, स्पेन के PM पेड्रो सांचेज़, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, Google के सुंदर पिचाई, OpenAI के सैम ऑल्टमैन, Microsoft के ब्रैड स्मिथ और AI के गॉडफादर यान लेकुन सब आए थे।

लेकिन ग्रेटर नोएडा की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने इस पूरे आयोजन को दुनियाभर में शर्मिंदगी का सबब बना दिया। और सबसे दुखद बात यह है कि यह शर्मिंदगी किसी बाहरी ताकत ने नहीं, भारत के अपने एक संस्थान ने करवाई।

दुनिया के हर बड़े मीडिया हाउस ने कवर किया – भारत का मजाक

इस घटना ने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों की सुर्खियां बटोरीं, और वो भी गलत कारणों से:

Associated Press (AP): दो सरकारी अधिकारियों के हवाले से लिखा “यह घटना मेजबान देश भारत के लिए शर्मिंदगी थी।” AP ने इसे भारत की AI और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की महत्वाकांक्षा पर सवाल खड़ा करने वाला बताया।

Bloomberg: हेडलाइन थी “Indian University Told to Exit AI Summit Over Robot Claim” यानी एक भारतीय यूनिवर्सिटी को रोबोट के झूठे दावे पर AI Summit से निकाला गया।

NBC News: “A robotic dog made in China gets an Indian university kicked out of an AI summit” चीन में बना रोबोटिक डॉग एक भारतीय यूनिवर्सिटी को AI Summit से बाहर करवा गया।

Al Jazeera: “Indian university faces backlash for presenting Chinese robot as its own” भारतीय यूनिवर्सिटी को चीनी रोबोट को अपना बताने पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा।

Euronews: “University booted from India AI summit after claiming China-made robotic dog as its own” चीनी रोबोटिक डॉग को अपना बताने पर यूनिवर्सिटी को AI Summit से निकाला गया।

Gulf News: शीर्षक था “Galgotias University Ousted from AI Summit Over Misleading Robotic Dog Claim.”

और सबसे बड़ा तमाचा? चीन का Global Times — जो चीनी सरकार का मुखपत्र माना जाता है उसने भी विस्तार से कवर किया।

Global Times ने लिखा कि यह घटना मेजबान देश भारत के लिए “शर्मिंदगी” है और भारतीय नेटिज़ेंस खुद जांच कर रहे हैं कि यूनिवर्सिटी ने और कितने “उधार के इनोवेशन” दिखाए। चीनी मीडिया ने इसे भारत की अकादमिक जवाबदेही और सरकारी आयोजनों में पारदर्शिता की कमी के प्रमाण के रूप में पेश किया।

एक पाकिस्तानी पत्रकार ने ट्वीट किया “भारत और मोदी के लिए कितनी शर्मनाक बात है। AI Summit को एक यूनिवर्सिटी ने बर्बाद कर दिया।”

आग में घी: IT मंत्री ने खुद शेयर किया था रोबोडॉग का वीडियो

unitree-go2-ai-robot-dog

इस शर्मिंदगी को और भी गहरा बनाने वाली बात यह है कि विवाद शुरू होने से पहले केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद X पर गलगोटिया के स्टॉल से रोबोडॉग का वीडियो शेयर किया था, इसे भारत की टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की उपलब्धि के रूप में हाइलाइट करते हुए। जब विवाद फूटा तो वीडियो चुपचाप डिलीट कर दिया गया।

Al Jazeera ने विशेष रूप से इस बात को नोट किया कि “शर्मिंदगी को IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने और बढ़ाया, जिन्होंने बैकलैश से पहले रोबोडॉग की क्लिप अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की थी।”

कांग्रेस ने इसी बात को पकड़ते हुए कहा “सबसे शर्मनाक बात यह है कि मोदी के मंत्री अश्विनी वैष्णव खुद वही झूठ फैला रहे थे, भारतीय Summit में चीन के रोबोट को प्रमोट कर रहे थे।”

X ने भी पकड़ा झूठ – Community Note लगा

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने जब X (पूर्व Twitter) पर अपना बचाव करते हुए लिखा कि “हमने कभी दावा नहीं किया कि हमने रोबोडॉग बनाया” — तो X प्लेटफॉर्म ने खुद Community Note जोड़ दिया:

“गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कैमरे पर दावा किया कि रोबोट उनकी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस टीम ने बनाया है। यहां कोई प्रोपेगैंडा नहीं है।”

यह शायद पहली बार था कि किसी भारतीय यूनिवर्सिटी की आधिकारिक पोस्ट पर X ने फैक्ट-चेक लगाया हो।

राहुल गांधी: “यह AI Summit नहीं, अव्यवस्थित PR तमाशा है”

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने X पर लिखा:

“भारत की प्रतिभा और डेटा का लाभ उठाने की बजाय, AI Summit एक अव्यवस्थित PR तमाशा बन गया है — भारतीय डेटा बिक रहा है, चीनी प्रोडक्ट्स प्रदर्शित हो रहे हैं।”

कांग्रेस ने चीनी मीडिया की रिपोर्ट्स के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा — “मोदी सरकार ने AI के मामले में भारत को दुनिया भर में हंसी का पात्र बना दिया। चीनी मीडिया ने हमारा मजाक उड़ाया। यह वाकई भारत के लिए शर्मनाक है।”

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने लिखा — “@AshwiniVaishnaw ने साबित कर दिया कि भारत में AI का मतलब ‘Ashwini is Incompetent’ है। यह AI Summit नहीं, सस्ता चाइना बाज़ार बन गया।”

शिवसेना (UBT) की सख्त मांग: “सिर्फ राष्ट्रीय नहीं, अंतरराष्ट्रीय अपमान”

शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने IANS से कहा — “यह सिर्फ राष्ट्रीय अपमान नहीं, अंतरराष्ट्रीय अपमान है। सरकार ने उनका स्टॉल खाली कराया, लेकिन यह सिर्फ एक कदम है। मुझे लगता है यूनिवर्सिटी पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए। उन्होंने जो किया वह बेशर्मी है।”

उन्होंने आयोजकों पर भी सवाल उठाए — “गलगोटिया को इतना बड़ा पैवेलियन दिया गया और उन्होंने इनोवेशन के नाम पर देश में भ्रम पैदा कर दिया। इससे चीनी मीडिया को प्रोपेगैंडा चलाने का मौका मिला।”

शिवसेना (UBT) सांसद अनिल देसाई ने पूछा — “अगर चीन में बना AI मॉडल प्रदर्शित हो रहा था, तो क्या आयोजकों को पता नहीं था? गलगोटिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रही है, तो उन्हें जगह देने वालों का क्या?”

UP विधानसभा तक पहुंचा मामला — SP ने मांगी जांच

20 फरवरी 2026 को यह विवाद उत्तर प्रदेश विधानसभा तक पहुंच गया। समाजवादी पार्टी के विधायकों सचिन यादव और पंकज मलिक ने ज़ीरो आवर में यह मुद्दा उठाया। सचिन यादव ने कहा — “हम गलगोटिया यूनिवर्सिटी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश और भारत दोनों को अपमानित किया। क्या हमारी सरकार सो रही है?”

BJD सांसद ससमित पात्रा ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि एक घटना ने पूरे Summit की सकारात्मकता से ध्यान हटा दिया।

RJD ने तो यूनिवर्सिटी के मालिक और IT मंत्री वैष्णव के बीच संभावित कनेक्शन की जांच की मांग तक कर दी।

India TV की ओपिनियन: “एक बेशर्म कृत्य ने पूरे राष्ट्र की छवि को धूमिल किया”

India TV ने अपने ओपिनियन पीस में लिखा — “एक बेशर्म कृत्य ने पूरे राष्ट्र की छवि को धूमिल कर दिया है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी का यह कृत्य इसका उदाहरण है। इसे यह कहकर नहीं टाला जा सकता कि गलती अनजाने में हुई।”

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि IT मंत्री वैष्णव ने कहा कि “एक प्रतिभागी के एक कृत्य के आधार पर पूरे Summit को आंकना उचित नहीं होगा।” लेकिन सच यह है कि नुकसान हो चुका था।

वो शर्मिंदगी जो टाली जा सकती थी

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है — यह सब कैसे हुआ?

1. स्क्रीनिंग कहां थी? 70,000 वर्ग मीटर के एक्सपो में 10 एरीना थे। क्या किसी ने यह चेक नहीं किया कि कौन क्या प्रदर्शित कर रहा है? प्रियंका चतुर्वेदी ने सही कहा कि अगर पहले से स्क्रीनिंग होती तो यह सब टाला जा सकता था।

2. IT मंत्री ने क्यों शेयर किया? अश्विनी वैष्णव ने रोबोडॉग का वीडियो बिना वेरिफाई किए शेयर कर दिया। एक केंद्रीय मंत्री का ऐसा करना सरकार की तैयारी पर गंभीर सवाल उठाता है।

3. Summit की शुरुआत ही खराब रही: AP और कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Summit की शुरुआत ही लंबी लाइनों, देरी और अव्यवस्था के साथ हुई। कुछ प्रदर्शकों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की कि उनके सामान और प्रोडक्ट्स चोरी हो गए। बाद में आयोजकों ने कहा कि सामान बरामद कर लौटा दिया गया। एक वायरल वीडियो में लोगों को Summit वेन्यू तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल चलते दिखाया गया।

$100 अरब का निवेश — लेकिन हेडलाइन बनी रोबोडॉग

इस Summit में वाकई कई ऐतिहासिक उपलब्धियां रहीं:

  • $100 अरब से अधिक AI निवेश प्रतिबद्ध हुआ
  • अदानी ग्रुप, माइक्रोसॉफ्ट, योट्टा ने बड़े निवेश घोषित किए
  • भारत का पहला सॉवरेन AI Box अनावरण किया गया
  • सुंदर पिचाई ने AI Professional Certificate कोर्स की घोषणा की
  • फ्रांस के मैक्रों ने एक दिल्ली के स्ट्रीट वेंडर की कहानी शेयर करते हुए भारत की टेक लीप की तारीफ की
  • UK-India FTA को लेकर £25 बिलियन निवेश की बात हुई

लेकिन दुनिया ने इनमें से कुछ भी याद नहीं रखा। दुनियाभर के मीडिया में हेडलाइन बनी — “भारतीय यूनिवर्सिटी ने चीनी रोबोट को अपना बताया, AI Summit से निकाली गई।”

एक इंटरनेट यूजर ने लिखा — “पहले चीन, अब कोरिया। गलगोटिया ‘उधार के इनोवेशन’ की वर्ल्ड टूर पर है।”

कितना बड़ा है यह नुकसान?

यह सिर्फ एक यूनिवर्सिटी की गलती नहीं है — यह भारत की AI कहानी में एक गहरा दाग है:

1. विश्वसनीयता पर सवाल: AP ने लिखा कि यह घटना भारत की AI और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के हब बनने की महत्वाकांक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।

2. चीनी प्रोपेगैंडा का हथियार: Global Times जैसी चीनी मीडिया ने इसे भारत की अकादमिक कमजोरी और सरकारी आयोजनों की खराब तैयारी के सबूत के रूप में पेश किया। प्रियंका चतुर्वेदी ने सही कहा कि “उनके तथाकथित इनोवेशन ने चीनी मीडिया को प्रोपेगैंडा का मौका दिया।”

3. असली इनोवेटर्स को नुकसान: AI Summit में सैकड़ों भारतीय स्टार्टअप्स ने असली इनोवेशन प्रदर्शित किए। लेकिन एक फर्जी दावे ने उन सबकी मेहनत पर पानी फेर दिया।

4. भारत की “Make in India” कहानी पर असर: जब दुनिया के सामने आप चीनी प्रोडक्ट को “Made in India” बताते हैं, तो यह सिर्फ एक यूनिवर्सिटी की बेइज्जती नहीं — यह पूरे “आत्मनिर्भर भारत” ब्रांड पर सवाल है।

गलगोटिया के पलटते बयान — एक टाइमलाइन

समयगलगोटिया का बयान
17 फरवरीDD News पर: “ओरियन को गलगोटिया के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने डेवलप किया है”
17 फरवरी (शाम)“यह प्रोपेगैंडा कैंपेन है, हमारे छात्र deeply pained हैं”
18 फरवरी (सुबह)“गलगोटिया ने यह रोबोडॉग नहीं बनाया, न कभी दावा किया” ➡ X ने Community Note लगाया
18 फरवरी (दोपहर)“हमारी प्रतिनिधि ill-informed थी, कैमरे के उत्साह में गलत बोल गई”
18 फरवरीरजिस्ट्रार: “develop और development में अंतर है”
18 फरवरी (शाम)“हमने स्थान खाली किया, आयोजकों की भावनाओं को समझते हैं”
19 फरवरीनेहा सिंह LinkedIn पर “Open to Work”

निष्कर्ष: एक शर्मनाक अध्याय

India AI Impact Summit 2026 भारत की AI कहानी का सबसे गौरवशाली अध्याय हो सकता था। $100 अरब का निवेश, 20 राष्ट्राध्यक्ष, दुनिया के सबसे बड़े टेक लीडर्स सब मौजूद थे। लेकिन एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने ₹2 लाख का चीनी रोबोट और ₹40,000 का कोरियन ड्रोन दिखाकर, उन्हें “अपना इनोवेशन” बताकर, पूरे देश को दुनिया में शर्मसार कर दिया।

Bloomberg से लेकर चीन के Global Times तक हर जगह भारत का मजाक बना। और सबसे दुखद बात यह है कि IT मंत्री ने खुद उस रोबोट को प्रमोट किया, X ने Community Note से झूठ पकड़ा, सरकार को बिजली काटकर और बैरिकेड लगाकर स्टॉल खाली कराना पड़ा, और यह मामला अब UP विधानसभा तक पहुंच चुका है।

यह घटना सिर्फ गलगोटिया की बदनामी नहीं यह भारत के हर उस असली इनोवेटर का अपमान है जो सच में कुछ बना रहा है। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में सख्त स्क्रीनिंग हो, और कोई भी संस्थान दूसरे देश के प्रोडक्ट को अपना बताने की हिम्मत न करे।

FAQs

Q1: गलगोटिया की वजह से भारत की अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती कैसे हुई?

Bloomberg, AP, NBC, Al Jazeera, Euronews, Gulf News और चीन के Global Times सहित दर्जनों अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे कवर किया। AP ने दो सरकारी अधिकारियों के हवाले से लिखा कि “यह मेजबान देश भारत के लिए शर्मिंदगी थी।”

Q2: IT मंत्री अश्विनी वैष्णव की क्या भूमिका थी?

वैष्णव ने विवाद से पहले गलगोटिया के रोबोडॉग का वीडियो X पर शेयर किया था, इसे भारत की उपलब्धि बताते हुए। विवाद के बाद वीडियो डिलीट कर दिया गया। कांग्रेस ने इसे “चीनी रोबोट को प्रमोट करना” बताया।

Q3: क्या UP विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा?

हां, 20 फरवरी को SP विधायकों ने ज़ीरो आवर में जांच की मांग की। सचिन यादव ने कहा कि गलगोटिया ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UP और भारत दोनों को अपमानित किया।

Q4: चीनी मीडिया ने क्या कहा?

Global Times ने इसे भारत के लिए “शर्मिंदगी” बताया और कहा कि भारतीय नेटिज़ेंस खुद जांच कर रहे हैं कि गलगोटिया ने और कितने “उधार के इनोवेशन” दिखाए।

Leave a Comment